नई दिल्ली, 6 दिसंबर 2025 – अगर आप नौकरी करते हैं, तो अब आपको ऑफिस के घंटों के बाद आने वाली बॉस की कॉल या ईमेल से कानूनी राहत मिल सकती है। दरअसल, संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण प्राइवेट बिल, ‘राइट टू डिस्कनेक्ट बिल 2025’ पेश किया गया है।
अगर यह बिल संसद में पास हो जाता है, तो कर्मचारी कानूनी रूप से अपनी शिफ्ट पूरी होने के बाद बॉस के कॉल या ईमेल को नज़रअंदाज़ (इग्नोर) कर सकते हैं।
यह बिल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की सांसद सुप्रिया सुले ने शुक्रवार को संसद में पेश किया है।
यह बिल कर्मचारियों को अपने निर्धारित काम के घंटों (शिफ्ट) के बाद ईमेल और कॉल से डिस्कनेक्ट होने का कानूनी अधिकार देने की बात करता है।
अगर यह कानून बनता है, तो यह कॉरपोरेट जगत के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा और कर्मचारियों को निजी समय का सम्मान मिलेगा।
‘राइट टू डिस्कनेक्ट बिल 2025’ एक प्राइवेट बिल है। भारतीय संविधान लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों को उन विषयों पर बिल पेश करने की अनुमति देता है जिन पर उन्हें लगता है कि सरकार को कानून बनाना चाहिए। हालांकि, अधिकांश प्राइवेट बिल सरकार के प्रस्तावित कानून पर जवाब देने के बाद वापस ले लिए जाते हैं।
इस सत्र में एक और महत्वपूर्ण प्राइवेट बिल पेश किया गया है। कांग्रेस सांसद कडियाम काव्या ने महिला कर्मचारियों के लिए ‘मेन्स्ट्रुअल लीव’ (मासिक धर्म अवकाश) की मांग करते हुए भी एक बिल पेश किया है। यदि यह बिल पास होता है, तो महिला कर्मचारियों को भी बड़ा लाभ मिल सकता है।